हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व है. पौष महीने की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है. पुत्रदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने का विधान है. इस बार पौष माह में 10 जनवरी को पुत्रदा एकादशी है. हिंदू धार्मिक मान्यता के अनुसार पुत्रदा एकादशी के दिन कुछ कार्यों करने की सख्त मनाही है, जिनको करने से साधक को जीवन में दुख और संकटों का सामना करना पड़ता है और भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी रुष्ट हो जाती हैं. साथ ही पूजा का पूरा फल भी प्राप्त नहीं होता है. तो चलिए हरिद्वार के ज्योतिषी से जानते हैं कि पुत्रदा एकादशी के दिन किन कार्यों को करने से बचना चाहिए.
कि पुत्रदा एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है. इस व्रत को विधि विधान से ना किया जाए तो इसका प्रतिकूल फल प्राप्त होता है. वैदिक पंचांग के अनुसार पौष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 09 जनवरी को दोपहर 12. 22 मिनट पर होगी. वहीं समापन 10 जनवरी को सुबह 10. 19 बजे होगा. उदया तिथि के अनुसार पुत्रदा एकादशी का व्रत 10 जनवरी को मनाया जाएगा.
पुत्रदा एकादशी के दिन किसी का अपमान नहीं करना चाहिए.
पुत्रदा एकादशी के दिन तामसिक भोजन से परहेज करना चाहिए.
साधक को सुबह की पूजा करने के बाद दिन में सोना नहीं चाहिए.
हिंदू धार्मिक मान्यता के अनुसार एकादशी के दिन तुलसी में जल नहीं देना चाहिए. तुलसी माता एकादशी
का निर्जला व्रत रखती हैं.
पुत्रदा एकादशी के दिन बाल और नाखून नहीं काटने चाहिए.
पुत्रदा एकादशी के दिन किसी पशु-पक्षी को परेशान न करें.
पुत्रदा एकादशी के दिन किसी के प्रति बुरा न सोचें.
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