एम्स भोपाल: एम्स भोपाल में रोबोट घुटने और कूल्हे के रिप्लेसमेंट की सर्जरी करेंगे। केंद्र ने इसकी अनुमति दे दी है। तीन महीने (अप्रैल) में इसकी शुरुआत हो सकती है। इससे सर्जरी की सटीकता 99% हो जाएगी। मध्य प्रदेश में घुटने और कूल्हे के रिप्लेसमेंट में तेजी आएगी, मरीजों का आर्थिक बोझ भी कम होगा। निजी अस्पतालों में ऐसी सर्जरी में डेढ़ से छह लाख रुपए तक खर्च होते हैं। एम्स निदेशक डॉ. अजय सिंह ने बताया, 18-20 करोड़ की रोबोटिक मशीनें खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। ऐसा करने वाला एम्स मप्र का पहला सरकारी अस्पताल होगा। पहली बार सरकारी अस्पताल में रोबोटिक सर्जरी 2022 में हमीदिया स्थित वर्कशॉप में की गई।
इसके फायदे
- छोटे चीरे से प्रक्रिया पूरी हो जाती है। रिकवरी तेजी से होती है, खून की कमी कम होती है।
- हाथों की तुलना में सर्जरी ज्यादा सटीकता और तेजी से होती है।
- सर्जरी में जहां पहुंचना मुश्किल होता है, वहां रोबोट आसानी से पहुंच जाते हैं।
- ऑपरेशन फेल होने की संभावना भी न के बराबर होती है।
गलती होने से पहले ही रोबोट रुक जाता है
यह एक कम्प्यूटरीकृत तकनीक है। यह डॉक्टर के सहायक के रूप में काम करता है। मरीज के विभिन्न कोणों से सीटी स्कैन डेटा और अन्य रिपोर्ट रोबोट में फीड की जाती हैं। इससे रोबोट यह आकलन करेगा कि हड्डी कितनी क्षतिग्रस्त हुई है। प्रत्यारोपण के दौरान इम्प्लांट की सबसे उपयुक्त स्थिति क्या है। गलती की आशंका होने पर रोबोट रुक जाता है।
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