रायपुर: कभी जंगलों में बंदूक थामे रहने वाली जैमेर निवासी श्रीमती नीला कवासी आज विकास और शांति की मिसाल बन चुकी हैं। गरीबी और मजबूरी ने उन्हें नक्सल रास्ते पर धकेल दिया था, लेकिन दिल के किसी कोने में वह हमेशा एक शांतिपूर्ण जीवन का सपना देखती थीं।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और गृहमंत्री श्री विजय शर्मा के नेतृत्व में नक्सलियों को नक्सल पुनर्वास योजना 2025 के तहत मुख्यधारा में लौटने का अवसर दिया गया, तब नीला ने हिम्मत दिखाई। उन्होंने आत्मसमर्पण कर न केवल हिंसा का रास्ता छोड़ा बल्कि अपने परिवार के लिए नई शुरुआत करने का संकल्प लिया।
आत्मसमर्पण के बाद शासन-प्रशासन ने नीला को विभिन्न पुनर्वास योजनाओं से जोड़ा। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत उन्हें एक पक्का घर और शौचालय की सुविधा मिली। यह घर उनके लिए सिर्फ रहने की जगह नहीं बल्कि जीवन के संघर्ष पर विजय का प्रतीक बन गया। तकनीकी व रोजगार सहायक ने घर निर्माण की निगरानी और बैंकिंग प्रक्रियाओं में उनका पूरा सहयोग किया। आज नीला अपने परिवार के साथ सुखमय जीवन जी रही हैं और गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।भावुक नीला कहती हैं कि पहले हमारे कच्चे घर में बरसात के दिनों में छत से पानी टपकता था। कई बार तो सोने की जगह नहीं बचती थी। अब प्रधानमंत्री आवास योजना की बदौलत हमें सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन मिला है। मैं अपने परिवार के साथ चौन की नींद सो पाती हूँ।
लोग उन्हें मिसाल के रूप में देखते हैं कि कठिन परिस्थितियों से निकलकर भी जीवन को नई दिशा दी जा सकती है। नीला कवासी प्रधानमंत्री और राज्य सरकार के प्रति आभार जताते हुए कहती हैं माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और मुख्यमंत्री जी का तहे दिल से अभारी हूँ। सरकार की कल्याणकारी योजनाओं ने हमारे जीवन में उजाला भर दिया है। प्रधानमंत्री आवास योजना से मुझे नया जीवन मिला है, यह उपकार मैं कभी नहीं भूल पाऊँगी। जिला प्रशासन नक्सल पुनर्वास नीति के अंतर्गत ऐसे सभी व्यक्तियों के पुनर्वास और पुनर्स्थापन के लिए हर संभव सहयोग प्रदान कर रहा है। सभी शासकीय योजनाओं का लाभ उन्हें दिया जा रहा है।
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