उत्तराखंड के टिहरी जिले की भिलंगना घाटी स्थित खतलिंग ग्लेशियर के सामने तेजी से बढ़ रही हिमनदीय झील (ग्लेशियल लेक) भविष्य में बड़ी आपदा का कारण बन सकती है। देहरादून स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग सहित अन्य संस्थानों के विज्ञानियों ने सैटेलाइट आंकड़ों और कंप्यूटर आधारित बाढ़ मॉडलिंग के आधार पर चेतावनी दी है कि यदि यह झील टूटती है तो अधिकतम 4377 घनमीटर प्रति सेकंड (क्यूमेक) पानी नीचे की घाटी में तबाही मचा सकता है। इसलिए मानसून के दौरान ग्लेशियर झीलों की सक्रिय निगरानी आवश्यक है।
शोध के अनुसार वर्ष 1999 से 2020 के बीच खतलिंग ग्लेशियर के सामने बनी झील का क्षेत्रफल 0.15 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 0.35 वर्ग किलोमीटर हो गया, यानी दो दशक में यह दोगुने से अधिक फैल गई। इसी अवधि में ग्लेशियर का क्षेत्रफल 0.21 वर्ग किलोमीटर घट गया। विज्ञानियों के अनुसार बढ़ते तापमान से ग्लेशियर तेजी से पिघल रहा है और उसी पानी से झील लगातार बड़ी होती जा रही है।
शोधकर्ताओं ने दो सबसे खतरनाक संभावित परिस्थितियों का मॉडल तैयार किया। पहला, झील के ऊपर से बहता पानी प्राकृतिक बांध काट दे और दूसरा, बांध के भीतर सुरंग बनकर वह अंदर से टूट जाए।
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