नई दिल्ली
जेन-जी से जुड़े एक कान्क्लेव में कॉकरोच जनता पार्टी तीनों मुख्य चेहरे-अभिजीत दीपक, आशुतोष रांका और सौरव दास शामिल हुए। इस दौरान दीपके से जब पूछा गया कि क्या आप बवाल मचाने दिल्ली आते हैं। आते ही फिर से आपने मार्च का ऐलान कर दिया। इस पर दीपके ने कहा कि मजबूरी में करना पड़ता है। हम थोड़ी ना करना चाहते है। लेकिन एक महीना होने को आ रहा है। हम बार-बार बोल रहे हैं कि जिन बच्चों ने सुसाइड किया है, उनके परिजनों को कंपनसेशन दे दीजिए आप।
दीपके ने कहा कि एक करोड़ रुपए की बात है। एक करोड़ कोई बड़ा अमाउंट नहीं है सरकार के लिए। 50 से 100 करोड़ आप सांसदों और विधायकों को खरीदने में लगा देते हो तो इन परिवारों को एक करोड़ क्यों नहीं दे रहे हो आप? यह कोई बड़ा अमाउंट नहीं है, लेकिन उसमें भी आप इतनी कंजूसी दिखा रहे हो। एक तो ये डिमांड हो गई। और दूसरा कि आपने जो एफआईआर किया है स्टूडेंट्स के ऊपर, वो वापस ली जाए। ये जो स्टूडेंट्स आए थे वो किसलिए आए थे? वे शिक्षा से जुड़े अपने अधिकार मांगने आए थे। कोई वोट तो नहीं मांग रहा था।
5 सितंबर को इंडिया गेट 1.0
न्यूज 24 चैनल के इस कार्यक्रम में जब दीपके से यह पूछा गया कि अब क्या करेंगे? क्या प्लान है? क्या अनाउंस क्या किया है आपने? क्या जंतर मंतर 2.0 करने जा रहे हैं। इस पर दीपके ने कहा कि यह इंडिया गेट 1.0 है। हम पांच सितंबर को इंडिया गेट से पुलिस हेडक्वार्टर तक मार्च करेंगे। हम मांग करेंगे कि स्टूडेंट्स पर लगे हुए झूठे केस वापस लिए जाएं और दूसरा प्लीज पीड़ित परिवारों को एक करोड़ रुपए दे दीजिए। दीपके ने कहा कि ये परिवार लोअर मिडिल क्लास से आते हैं।
दीपके ने कहा कि मैं आकांक्षा चतुर्वेदी के फैमिली से मिला था। उसके पापा को पैरालिसिस का अटैक आकर गया। हार्ट अटैक आकर गया। उनका छोटा कैटरिंग का बिजनेस था। उन्होंने 15 लाख का लोन लिया था बेटी को डॉक्टर बनाने के लिए। उनको लग रहा था बेटी डॉक्टर बन जाएगी तो घर वही चलाएगी। अभी वो कह रहे हैं कि बेटी तो चली गई। छोटा बच्चा है। उसको मैं अब कैसे संभालूंगा? मैं तो कमा नहीं सकता। दीपके ने कहा कि यह जो एक करोड़ रुपए हैं, उनसे उन पीड़ित परिवारों को काफी मदद मिलेगी जो लोन के दबाव में है। हम सभी जानते हैं कि कोचिंग करने में पैसा लेना पड़ता है।
जयपुर हमले का जिक्र
जयपुर में हुए हमले को याद दिलाते हुए जब आशुतोष रांका से पूछा गया कि क्या अब जब आप मार्च करेंगे तो जयपुर जैसा कुछ हो गया तो… या फिर जंतरमंतर और कनॉट प्लेस में जो हुआ वैसा हो गया तो… आपको इस बात की कोई आशंका या चिंता नहीं है? इस पर रांका ने कहा कि नहीं नहीं, बिल्कुल चिंता नहीं है। हम तो जयपुर की घटना के बाद कल जोधपुर भी चले गए। उसके बाद आज यहां आना था, नहीं तो आगे बाड़मेर और बीकानेर के दौरे की तैयारी थी। देखिए, हम लोग इन लोगों से वोट मांगने तो जा नहीं रहे हैं।
स्कूलों को ठीक करने की बात कर रहे
अभी राजस्थान में सरपंच के चुनाव होने वाले हैं। हम लोग यह तो नहीं बोल रहे हैं कि भाई कॉकरोच जनता पार्टी के सरपंच बना दो। हम तो वहां पर स्कूलों को ठीक करने की बात कर रहे हैं। स्कूल ठीक कर दीजिए। भैंसों के तबेले में तो कम से कम स्कूल नहीं चलना चाहिए। 80 साल हो गए हैं इस देश को आजाद हुए हुए। क्षेत्रफल के हिसाब से राजस्थान सबसे बड़ा राज्य है देश का। उसकी राजधानी में अगर एक ऐसा स्कूल है जो भैंसों के तबेले में चल रहा है तो यह पूरे देश के लिए शर्म की बात है।
हम पिटने वाले लोग हैं, पिट लेंगे
जब रांका से हिंसा को लेकर फिर से पूछा गया तो अभिजीत दीपके ने कहा कि सर, हम पिट कर आने वाले लोग हैं। मैं पिट लिया, ये (रांका) पिट लिया। अब सौरव बचा है। उसका भी नंबर आएगा। हम पिटने वाले लोग हैं। हम पिट लेंगे।
मंत्रियों ने वादा किया था
चर्चा के दौरान सुप्रीम कोर्ट के आर्डर पर सौरव दास ने कहा कि देखिए इफ देयर इज अ विल देयर इज अ वे। अगर केंद्र के दो मंत्री हमारे साथ बैठकर प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुछ कमिट कर रहे हैं तो कुछ सोच समझ कर ही कर रहे होंगे। दूसरी बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने तो उनको एक बहुत क्लियर ऑप्शन दे दिया है। हमारे संविधान में आर्टिकल 142 एक प्रोविजन है, जिसके तहत सुप्रीम कोर्ट अपना एक्स्ट्राऑर्डिनरी पावर यूज करके कंप्लीट जस्टिस करने के लिए कुछ भी कर सकता है। उसने वो पावर यूज करने का ऑप्शन दिया है। इसलिए 18 अगस्त को जो सुनवाई हुई थी, वह बहुत महत्वपूर्ण थी।
दो वादे पूरे नहीं हुए हैं
सुप्रीम कोर्ट ने तीन बार केंद्र सरकार के वकील को बोला कि आप हमें पूरे देश भर से एफआईआर की लिस्ट दे दीजिए। उसको एक झटके में हम लोग खत्म कर देंगे। लेकिन, केंद्र सरकार के जो लॉयर थे, उन्होंने इसके लिए कमिट नहीं किया। ऐसे में हमें लगा कि यहां पर एक साजिश चल रही है। युवाओं के साथ विश्वासघात होने वाला है। इसलिए हमको यह स्टेप लेना पड़ा। 5 सितंबर को इसलिए हम लोग शांति मार्च निकालेंगे, क्योंकि दो वादे पूरे नहीं हुए हैं। एक तो सभी एफआईआर दर्ज करने की और दूसरा पीड़ित परिवारों को एक-एक करोड़ मुआवजा देने की।
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