नेपाल में बिजली संकट के बीच भारत देगा रोजाना 18 घंटे बिजली, बाढ़ ने पावर सेक्टर को किया तबाह

नेपाल में बिजली संकट के बीच भारत देगा रोजाना 18 घंटे बिजली, बाढ़ ने पावर सेक्टर को किया तबाह

काठमांडू 
प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहे पड़ोसी देश नेपाल की मदद के लिए भारत ने एक बार फिर दोस्ती का हाथ बढ़ाया है। भीषण बाढ़ और भूस्खलन के कारण नेपाल के हाइड्रोपावर इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे वहां बिजली का गंभीर संकट पैदा हो गया है। इस संकट से उबारने के लिए भारत ने 31 दिसंबर 2026 तक नेपाल को रोजाना 18 घंटे 654 मेगावाट (MW) तक बिजली निर्यात करने की मंजूरी दे दी है।

नेपाल के 'नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी' के मुताबिक, इस तबाही में अब तक 1,385 से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 5,130 लोग अभी भी लापता हैं। नेपाल और तिब्बत सीमा के पास बीते 26 अगस्त को हुए बर्फ की चट्टान खिसकने (Avalanche) के बाद आई इस तबाही ने दर्जनों गांवों और बुनियादी ढांचे को तहस-नहस कर दिया है।

क्यों ठप पड़ गया नेपाल का पावर सेक्टर?
नेपाल अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह से नदियों और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स पर निर्भर है। लेकिन इस भौगोलिक निर्भरता का एक नुकसान यह भी है कि जब भी बाढ़ या भूस्खलन जैसी आपदा आती है, तो नेपाल का पावर ग्रिड रातों-रात धराशायी हो जाता है।

12 से ज्यादा पावर प्लांट तबाह: इस विनाशकारी बाढ़ में 12 से ज्यादा हाइड्रोपावर प्लांट या तो बह गए या उन्हें भारी नुकसान पहुंचा है।

कर्मचारी भी लापता: पावर सेक्टर में काम करने वाले लगभग 900 कर्मचारी भी लापता बताए जा रहे हैं, जिससे मरम्मत का काम भी ठप पड़ा है।

उलट गए हालात: जो नेपाल हाल के सालों में अपनी अतिरिक्त बिजली भारत को बेच रहा था, इस आपदा ने पासा पलट दिया। अब नेपाल को अपनी घरेलू जरूरतें पूरी करने के लिए भारत से बिजली मांगनी पड़ रही है।

654 MW बिजली सप्लाई का क्या है प्लान?
भारतीय विद्युत मंत्रालय ने 13 सितंबर से 31 दिसंबर 2026 तक के लिए इस सप्लाई को हरी झंडी दे दी है। यह बिजली नेपाल को आधी रात 12 बजे से शाम 6 बजे तक यानी दिन के 18 घंटे उपलब्ध कराई जाएगी।

कुल 654 मेगावाट में से 600 मेगावाट बिजली मुजफ्फरपुर-ढालकेबार 400 kV डबल-सर्किट लाइन के जरिए भेजी जाएगी। बाकी 54 मेगावाट बिजली तनकपुर-महेंद्रनगर 132 kV लाइन से सप्लाई होगी।

दिन का समय क्यों चुना गया?
दिन के समय भारत के पास अपनी सौर ऊर्जा की अच्छी-खासी उपलब्धता रहती है। ऐसे में अपनी सरप्लस ग्रीन एनर्जी का इस्तेमाल कर भारत पड़ोसी देश की मदद आसानी से कर पा रहा है।

भारत ने साफ किया है कि यह व्यवस्था 31 दिसंबर तक के लिए है। जनवरी 2027 से नेपाल को कितनी बिजली दी जाएगी, इसका रिव्यू दिसंबर के आखिरी हफ्ते में किया जाएगा।

मुश्किल वक्त में काम आई भारत-नेपाल की दोस्ती
नेपाल के पास नदियां और पनबिजली की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन भारत के पास वह मजबूत ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर और बैकअप है जो किसी भी आपात स्थिति में नेपाल की लाइफलाइन बन सकता है।

भारत के विद्युत मंत्रालय का कहना है कि इस फैसले से नेपाल को संकट से उबरने में मदद मिलेगी और दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऊर्जा संबंधों को और मजबूती मिलेगी। भारत के लिए यह कदम केवल एक मदद नहीं, बल्कि अपनी 'नेबरहुड फर्स्ट' (पड़ोसी प्रथम) कूटनीति की एक ठोस और व्यावहारिक मिसाल है।

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