नई दिल्ली
ब्रिटेन के मौसम विभाग (मेट ऑफिस) ने चेतावनी दी है कि इस साल का एल नीनो पिछले 100 से अधिक वर्षों में सबसे अधिक विनाशकारी और शक्तिशाली रूप ले सकता है। प्रशांत महासागर की सतह का तापमान सामान्य से 3°C से भी अधिक रहने का अनुमान है, जो आधुनिक जलवायु रिकॉर्ड में अब तक का उच्चतम स्तर है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस अभूतपूर्व घटना के कारण साल 2027 वैश्विक स्तर पर अब तक का सबसे गर्म साल साबित हो सकता है और यह 2024 के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ देगा।
भारत पर दोहरा असर
भारत में एल नीनो का असर सीधा मॉनसून की बारिश पर पड़ता है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का अनुमान है कि इस पूरे सीज़न में बारिश लंबी अवधि के औसत की महज 90 प्रतिशत रह सकती है, जो पिछले 11 वर्षों में सबसे कम है।
इसका सीधा असर देश के कृषि क्षेत्र पर पड़ रहा है, जहां दो लगातार फसल सीजन प्रभावित होने की आशंका है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, चालू सीज़न में बारिश में आई कमी की वजह से फसलों की बुवाई और पैदावार को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। IIT-कानपुर के विज़िटिंग प्रोफेसर रघु मुर्तुगुड्डे के अनुसार, इस एल नीनो का नकारात्मक प्रभाव 2027 तक खिंच सकता है।
चालू रबी फसल की पैदावार प्रभावित होने के कारण सरकार को पहले ही खाद्य तेलों और चीनी जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति व कीमतों को नियंत्रित करने के लिए एहतियाती कदम उठाने पड़ रहे हैं।
वैश्विक तापमान और हीटवेव का अलर्ट
मेट ऑफिस के जलवायु विशेषज्ञ एडम स्काइफ ने इस स्थिति को बेहद असाधारण बताते हुए कहा कि दीर्घकालिक जलवायु मॉडल में इस तरह का तीव्र संकेत पहले कभी नहीं देखा गया।
अमेरिकी एजेंसी NOAA के आंकड़ों पर आधारित क्लाइमेट ब्रिंक डैशबोर्ड का अनुमान है कि प्रशांत महासागर में तापमान वृद्धि का यह आंकड़ा नवंबर तक 3.9 डिग्री के चिंताजनक स्तर तक पहुंच सकता है, जो 2015-16 के पिछले सबसे बड़े एल नीनो रिकॉर्ड से काफी अधिक है।
रिकॉर्ड गर्मी दर्ज होने की संभावना
IMD के वरिष्ठ वैज्ञानिक ओपी श्रीजीत के अनुसार, 2027 में वैश्विक स्तर पर रिकॉर्ड गर्मी दर्ज होने की लगभग पूरी संभावना है। वहीं, भारत में औसत तापमान का नया रिकॉर्ड बनेगा या नहीं, यह 2027 के मॉनसून और एल नीनो दक्षिणी दोलन (ENSO) की स्थितियों पर निर्भर करेगा, लेकिन अगले साल वसंत के मौसम में देश भर में भीषण हीटवेव चलने की पूरी आशंका है।
क्या होता है एल नीनो?
एल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु पैटर्न है, जिसके तहत मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के पानी का तापमान असामान्य रूप से बढ़ जाता है। इससे वैश्विक स्तर पर हवाओं की दिशा, वायुमंडलीय दबाव और बारिश के चक्र में भारी बदलाव आते हैं।
आमतौर पर हर दो से सात साल में आने वाली यह घटना 9 से 12 महीने तक टिकती है और इसका सबसे भयावह वैश्विक असर इसके शुरू होने के अगले वर्ष दिखाई देता है।
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