12 वर्ष बाद आयोजित होने वाली नंदा देवी बड़ी जात को लेकर चमोली के यात्रा मार्ग से जुड़े गांवों में उत्साह और रौनक बढ़ने लगी है। लोकदेवी नंदा की पूजा-अर्चना और यात्रा में शामिल होने के लिए प्रवासियों और धियाणियों की घर वापसी शुरू हो गई है। गांवों में घरों की रंगाई-पुताई, रास्तों की सफाई और श्रद्धालुओं के स्वागत की तैयारियां तेजी से चल रही हैं।
नंदा देवी बड़ी जात को हिमालयी महाकुंभ के रूप में जाना जाता है। पांच सितंबर को सिद्धपीठ कुरुड़ से मां नंदा की डोली के साथ यात्रा शुरू होगी। यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां नंदा के दर्शन और आशीर्वाद के लिए शामिल होंगे।
हक-हकूकधारियों के जिम्मे डोली को आगे ले जाने की परंपरा
नंदा देवी लोकजात प्रतिवर्ष आयोजित होती है, जबकि बड़ी जात का आयोजन 12 वर्ष में एक बार किया जाता है। परंपरा के अनुसार यात्रा हक-हकूकधारियों के सहयोग से आगे बढ़ती है। जिस गांव में मां नंदा की डोली पहुंचती है, वहां के ग्रामीण डोली को अगले पड़ाव तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाते हैं।
यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के भोजन और ठहरने की व्यवस्था भी संबंधित गांवों के हक-हकूकधारियों और ग्रामीणों की ओर से की जाती है। इसके लिए गांवों में व्यवस्था समितियों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। घरों और रास्तों की सफाई के साथ ग्रामीण इस आयोजन को लोक उत्सव के रूप में मनाने की तैयारी में जुटे हैं।
रामणी में होगा देव डोलियों और छंतोलियों का मिलन
बड़ी जात के दौरान वाण से आगे के पांच निर्जन पड़ाव सबसे चुनौतीपूर्ण माने जाते हैं। यहां डोली को पहुंचाने की व्यवस्था परंपरा के अनुसार रामणी के ग्रामीण करते हैं। यात्रा के प्रमुख पड़ाव रामणी में मां नंदा के साथ दशोली बंड की डोली, भगवान बदरी विशाल की छंतोली, लाता की नंदा, कोट कंडारा-दशोली पट्टी दशमद्वार की डोली सहित विभिन्न देव डोलियों और छंतोलियों का मिलन होगा।
रामणी से 13 सितंबर को बड़ी जात अगले पड़ाव के लिए रवाना होगी। इसके बाद वापसी तक मां नंदा की डोली को रामणी के ग्रामीण ही आगे ले जाएंगे। बड़ी जात को लेकर रामणी में आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
11 सितंबर से शुरू होगा तीन दिवसीय लोक सांस्कृतिक मेला
देव डोलियों के रामणी पहुंचने के अवसर पर 11 सितंबर से तीन दिवसीय श्री नंदा देवी रामणी लोक सांस्कृतिक पर्यटन विकास मेला आयोजित किया जाएगा। मेला आयोजन समिति के अध्यक्ष सूरज पंवार के नेतृत्व में ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर यात्रा कार्यक्रम और सुरक्षा समेत अन्य व्यवस्थाओं पर चर्चा की है।
13 सितंबर को बड़ी जात के अगले पड़ाव के लिए रवाना होने के साथ ही तीन दिवसीय मेले का समापन होगा। बड़ी जात को लेकर यात्रा मार्ग के गांवों में तैयारियां अंतिम चरण में पहुंचने लगी हैं और प्रवासियों व धियाणियों की वापसी से गांवों में उत्सव जैसा माहौल बनने लगा है।
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