नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा के बाद उत्तराखंड में भी हिमनद झीलों को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। प्रदेश में संवेदनशील हिमनद झीलों की लगातार निगरानी करने के साथ ही संभावित खतरे की समय रहते सूचना देने के लिए अर्ली वॉर्निंग सिस्टम विकसित किया जा रहा है। इसकी शुरुआत चमोली जिले के वसुंधरा ताल से होगी, जहां इसी माह सेंसर आधारित चेतावनी तंत्र स्थापित किया जाएगा।
सीबीआरआई के सहयोग से लगेगा सेंसर सिस्टम
आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक वसुंधरा ताल में केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) के सहयोग से सेंसर आधारित अर्ली वॉर्निंग सिस्टम लगाया जाएगा। इसके जरिए झील में होने वाले बदलावों की तकनीकी निगरानी की जा सकेगी। झील के जलस्तर या अन्य मानकों में असामान्य परिवर्तन सामने आने पर समय रहते चेतावनी जारी करने में मदद मिलेगी।
सी-डेक भी लगाएगा अपना सिस्टम
सीबीआरआई की व्यवस्था के बाद सी-डेक (सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग) भी वसुंधरा ताल में इसी तरह का सिस्टम स्थापित करेगा। इससे झील की निगरानी के लिए तकनीकी तंत्र को और मजबूत किया जा सकेगा।
आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन के अनुसार वसुंधरा ताल में लगाए जाने वाले सिस्टम के परिणामों का आकलन किया जाएगा। इसके आधार पर प्रदेश की अन्य संवेदनशील हिमनद झीलों में भी अर्ली वॉर्निंग सिस्टम लगाने की योजना तैयार की जाएगी।
हिमनद झीलों पर बढ़ी निगरानी
उत्तराखंड में हिमनद झीलों की संख्या अधिक होने के कारण इनके संभावित खतरों को लेकर सरकार निगरानी व्यवस्था मजबूत कर रही है। अचानक जलस्तर बढ़ने या झील में किसी तरह के असामान्य बदलाव की स्थिति में समय रहते जानकारी मिलना जरूरी है। अर्ली वॉर्निंग सिस्टम इसी दिशा में महत्वपूर्ण तकनीकी पहल साबित हो सकता है।
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